BhaktiVed
కృష్ణుడు

आवेल आशा भर्या

garbaరచన: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)

आवेल आशा भर्या

आशा भर्या ते अमे आवियां

ने मारे वाले रमाड्या रास रे,

आवेल आशा भर्या…… (२)

शरदपूनमनी रातडी ने

कांई चांदो चड्यो आकाश रे…. आवेल…

वृंदा ते वनना चोकमां

कांई नामे नटवरलाल रे…. आवेल…

जोतां ते वळतां थंभियां

ओल्या नदियुं केरा नेर रे…. आवेल…

अष्टकुळ पर्वत डोलिया ने

ओल्या डोल्या नवकुळ नाग रे…. आवेल…

मे’ता नरसैयाना स्वामी शामळिया

सदा राखो चरणनी पास रे…. आवेल…

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