BhaktiVed
కృష్ణుడు

अब मोहे क्युं तरसावौ

భజనరచన: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

धुन लावनी - ताल कहरवा

तुमरे कारण सब सुख छोड्या, अब मोहे क्युं तरसावौ हौ.

विरह-व्यथा लागी उर अंतर, सो तुम आय बुझावौ हौ.

अब छोडत नहीं बनहि प्रभुजी, हंसकर तुरत बुलावौ हौ.

मीरां दासी जनम-जनम की, अंग से अंग लगावौ हौ.

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