BhaktiVed
ॐ

अखंड वरने वरी

భజనరచన: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

अखंड वरने वरी

अखंड वरने वरी साहेली, हुं तो अखंड वरने वरी.

भवसागरमां महादुःख पामी, लख चोरासी फरी ... साहेली हुं. (1)

संसार सर्वे भयंकर काळो, ते देखी थरथरी.

कुटुंब सहोदर स्वार्थी सर्वे, प्रपंचने परहरी ... साहेली हुं. (2)

जनम धरीने संताप वेठ्या, घरनो ते धंधो करी,

संतजगतमां महासुख पामी, बेठी ठेकाणे ठरी ... साहेली हुं. (3)

सद्दगुरुनी पूरण कृपाथी, भवसागर हुं तरी,

बाई मीरां कहे प्रभु गिरिधर नागर, संतोना चरणे पडी ... साहेली हुं (4)

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