BhaktiVed
కృష్ణుడు

लावो लावो कागळियो ने दोत (२)

భజనరచన: ન્હાનાલાલ (Nhanalal)

लावो लावो कागळियो ने दोत (२)

मोरार साहेब

लावो लावो कागळियो ने दोत, लखीए हरिने रे ;

एवो शो छे अमारो दोष, नो'व्या फरीने रे…

जाव जाव धुतारा क्हान, तमे छो बहु रंगी रे;

तमे कोईनां न राख्यां मान, घणांना छो संगी रे…

ऊंडा कूवामां आज, उतार्यां हरिए अमने रे,

एवां वरत वाढोमा महाराज, घटे नहीं हरि तमने रे…

गुरुजी अमृत पाईने आज,उछेर्या हरि अमने रे,

एवां वखडां घोळो मा महाराज, ! घटे नहीं हरितमने रे…

अमर पछेडो आज ओढाड्यो, हरि अमने रे,

खेंची लियो मा महाराज, ! घटे नहीं हरितमने रे…

आंगळीओ झालीने आज, रमाड्यां हरिए अमने रे,

तमे तरछोडो मा महाराज, हरि अमने रे,

सांभळी रवि गुरु भाण, त्रिकम बेडी तारो रे,

एवा मोरार कहे छे रे महाराज, भवसागर उतारो रे…

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