BhaktiVed
కృష్ణుడు

प्रेमनी वात छे न्यारी

భజనరచన: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

प्रेमनी वात छे न्यारी

प्रेमनी वात छे न्यारी, ओधवजी, प्रेमनी वात छे न्यारी.

प्रेमनी वातमां तमे शुं जाणो ? ने बीजा शुं जाणे संसारी ?

प्रेमनी वातमां भूल्या छो भक्तो, तन मन धन ओवारी.

तमारो रंग, ओधा, रंग छे पतंगनो, अमारो रंग छे करारी.

मीरां के प्रभु गिरिधर नागर, चरणकमल बलिहारी.

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