BhaktiVed
కృష్ణుడు

श्याम, मने चाकर राखोजी

భజనరచన: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

म्होंने चाकर राखो जी,

गिरधारी लला, चाकर राखो जी टेक

चाकर रहसूं, बाग लगासूं, नित उठ दरसन पासूं;

वृंदावनकी कूंज गलिनमें, गोविंद लीला गासूं... मने चाकर

चाकरी में दरसन पाउं, सुमिरन पाऊं खरची;

भाव भगति जागीरी पाऊं, तीनों बाता सरसी... मने चाकर

मोर मुकुट पीतांबर सोहे, गले बैजंती माला,

वृंदावनमें धेनुं चरावे, मोहन मुरलीवाला... मने चाकर

ऊंचे ऊंचे महल बनाऊं बिच बिच रखुं बारी,

सांवरियां के दरसन पाऊं, पहिर कुसुम्बी सारी... मने चाकर

जोगी आया जोग करनकूं, तप करने संन्यासी;

हरि-भजनकू साधु आये, वृंदावन के वासी... मने चाकर

मीरां के प्रभु गहिर गंभीरा हृदे रहो जी धीरा;

आधी रात प्रभु दरसन दीन्हों, जमुनाजी के तीरा... मने चाकर

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