BhaktiVed
Vishnu

Om Jai Jagdish Hare

AartiAuthor: श्रद्धाराम फिल्लौरी (Shardha Ram Phillauri)Universal evening aarti; sung after every satsang

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ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।

भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

ॐ जय जगदीश हरे।

जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का, स्वामी दुःख बिनसे मन का।

सुख सम्पत्ति घर आवे, सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

ॐ जय जगदीश हरे।

मात पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी, स्वामी शरण गहूँ किसकी।

तुम बिन और न दूजा, तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥

ॐ जय जगदीश हरे।

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी, स्वामी तुम अन्तर्यामी।

पारब्रह्म परमेश्वर, पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥

ॐ जय जगदीश हरे।

तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता, स्वामी तुम पालनकर्ता।

मैं मूरख खल कामी, मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता॥

ॐ जय जगदीश हरे।

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति, स्वामी सबके प्राणपति।

किस विधि मिलूँ दयामय, किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥

ॐ जय जगदीश हरे।

दीनबन्धु दुःखहर्ता, ठाकुर तुम मेरे, स्वामी रक्षक तुम मेरे।

अपने हाथ उठाओ, अपने शरण लगाओ, द्वार पड़ा तेरे॥

ॐ जय जगदीश हरे।

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा, स्वामी पाप हरो देवा।

श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥

ॐ जय जगदीश हरे।

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।

भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

ॐ जय जगदीश हरे।

Source: Composed by Shardha Ram Phillauri, c. 1870; text as printed in standard aarti-sangrah booklets and on temple aarti boards

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