BhaktiVed
Shiv

Shri Bhairav Chalisa

ChalisaKalashtami; Sunday

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दोहा

श्री गणपति गुरु गौरि पद, प्रेम सहित धरि माथ।

चालीसा वन्दन करो, श्री शिव भैरवनाथ॥

श्री भैरव संकट हरण, मंगल करण कृपाल।

श्याम वरण विकराल वपु, लोचन लाल विशाल॥

चौपाई

जय जय श्री काल भैरव कृपाला।

दुष्ट जन के काल कराला॥

कालभैरव शिव रूप तुम्हारो।

अपनो दास आप उबारो॥

दीप जला भैरव दर्शन।

करें सभी मिल तुमहिं नमन॥

भैरव भगवन ध्यान धरे।

नित्य सबै सुमिरन करे॥

श्याम वर्ण श्वान वाहन।

काशी नगरी तुम्हरो रहन॥

भक्तन के संकट निवारो।

जन्म-मरण भय सब टारो॥

दर्शन लालसा मन लाई।

आवो भैरव अब सुधि लाई॥

भक्त रक्षा हेतु तुम्हारी।

अनुपम छवि मनहरण भारी॥

दीन जानि मम विनय सुनाई।

द्वार खड़ा भैरव दुहाई॥

काशी के कोतवाल कहाई।

सबै रक्षा तुम्हरे ही आई॥

सदा सहाय तुम्हरो नाथा।

रखियो जन के ऊपर हाथा॥

दुख सब टारो, सुख सब दीजै।

भैरव दास अपनो कीजै॥

नित्य दया बरसाओ स्वामी।

अन्तर्यामी तुम प्रभु नामी॥

भैरव नाम सदा जो गावे।

जीवन में सब सुख वो पावे॥

भूत प्रेत भय निकट न आवे।

भैरव नाम जो नित्य ध्यावे॥

सब विधि संकट हरण भैरव।

दुःख दारिद्र शमन भैरव॥

जय भैरव काल भैरव।

पूजा करे नर, सुख पावे सब॥

दोहा

जय जय जय भैरव नाथ, काशी के कोतवाल।

कहत 'दास' यह चालीसा, सुनि लीजै तत्काल॥

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Source: Traditional Bhairav Chalisa as printed in chalisa-sangrah booklets

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