BhaktiVed
Ram

Aa Kone Banavyo Charkho?

BhajanAuthor: રવિ સાહેબ (Ravi Saheb)

आ कोणे बनाव्यो चरखो?

नुरते सुरते नीरखो

एना घडनाराने परखो;

आ कोणे बनाव्यो चरखो ?

आवे, जावे ए बोलावे,

ज्यां जुओ त्यां सरखो;

देवळ, देवळ करे पुकारा,

पारख थईने परखो !.. आ कोणे..

ध्यानकी धूनमें ज्योत जलत हे,

मीट्यो अंधार अंतरको;

ए अजवाळे अगम सूझे,

भेद जड्यो उन घरको.. आ कोणे..

पांच तत्व का साज बनाया,

खेल खरो ए नरको;

पवन-पूतळी रमे प्रेमसे,

ज्ञानी होके नीरखो.. आ कोणे..

रविराम बोल्या पडदा खोल्या,

मैं गुलाम उन घरको;

ए चरखानी आश न करजो,

चरखो नहीं रहे सरखो.. आ कोणे..

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