BhaktiVed
माता

आसो मासो शरद पूनमनी रात

garbaरचना: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)

आसो मासो शरद पूनमनी रात

आसो मासो शरद पूनमनी रात जो

चांदलियो ऊग्यो रे सखी मारा चोकमां

ससरो मारो ओला जनमनो बाप जो

सासु रे ओला जनमनी मावडी

जेठ मारो अषाढीलो मेघ जो

जेठाणी झबूके वादळ वीजळी

देर मारो देरासरनो देव जो

देराणी देरासर केरी पूतळी

नणंद मारी वाडी मायली वेल जो

नणदोई मारो पारस पीपळो

परण्यो मारो सगी नणंदनो वीर जो

ताणीने बांधे नवरंग पाघडी

आसो मासो शरद पूनमनी रात जो

चांदलियो ऊग्यो रे सखी मारा चोकमां

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