BhaktiVed
ॐ

अखाना छप्पा

భజనరచన: અખો (Akho)

अखो (१७ मी सदी मध्य) गुजराती भाषाना प्राचीन कविओ मांनो एक छे.सल्तनती समयगाळामां गुजरातीनां त्रण मोटा साहित्यकारोमां अखानी गणना थाय छे.अखाए जेतलपुर थी अमदावाद वसवाट कर्यो (१६००-१६५५).आजे पण अमदावादनी खाडियानी देसाइ पोळनुं एक मकान "अखाना ओरडा" तरीके ओळखाय छे,जे आपणने गुजरातनां आ बहु शरूआतनां साहित्यकारो मांनां एकनी याद अपावे छे.

जीवनना शरूआतना गाळामां ते सोनी हतो. पछीथी पोनानी धर्मनी बहेनथी विश्वासघात थतां तेनो समाज परथी विश्वास उडी गयो. तेणे एक गुरूनुं शरण लीधुं.पण ज्यारे अखाने खबर पडी के ते गुरू पण ढोंगी छे, त्यारे तेने ख्याल आव्यो के समाजमां बधीज जग्याए ढोंग अने असत्य चाले छे.

छप्पा

आ साथे तेणे छप्पा लखवानुं चालु कर्युं. अखाना छप्पामां समाजमां रहेल आडंबर प्रत्येनो तिरस्कार जोवा मळे छे. "एक मुरखने एवी टेव, पथ्थर एटला पूजे देव" जेवा छप्पाओमां अखो ते समये धर्मने नामे चालती अंधश्रद्धाने पोतानी चाबखा जेवी वाणीना सपाटामां लेतो जोवा मळे छे.

अखाए कुल ७४६ छप्पा लखेल छे. जे ४४ अंगमां,अने आ अंगोने मुख्य चार अंगवर्गमां वहेंची शकाय. जोके अखाए आ विभागो पाडेल नथी,परंतु तेमनां छप्पाओ मां वर्णवायेल विचारोने ध्याने राखी विद्वानोए आ मुजब वर्गिकरण करेल छे.

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