BhaktiVed
Krishna

Ame Pakdi Aambliyani Dal Re

BhajanAuthor: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

अमे पकडी आंबलियानी डाळ रे

बाई, अमे पकडी आंबलियानी डाळ रे,

जंगल मांही एकली होजी—

ओतरने दखणथी चडी एक वादळी रे

वरस्या बारे मेघ रे

बीजाने मारे आखडी हो जी.

नदी रे किनारे बेठो एक बगलो रे,

हंसलो जाणी कीधी प्रीत रे,

मुंढामां लीधी माछली हो जी—

फूलनो पछेडो ओढुं प्रेम घाटडी रे,

बाई, मारो शामळियो भरथार रे,

बीजाने मारी चूंदडी हो जी.

बाई मीरांकहे प्रभु गिरिधरना गुण,

बाई, मारो पियुडो परदेश रे,

फरुके मारी आंखडी हो जी.

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