BhaktiVed
ॐ

Ant:karanthi Pujavani Aasha

BhajanAuthor: ગંગાસતી (Gangasati)

अंत:करणथी पूजावानी आशा

अंत:करणथी पूजावानी आशा राखे

ने एने केम लागे हरिनो संग रे,

शिष्य करवा नहि एवा जेने

पूरो चड्यो न होय रंग रे ... अंतःकरणथी.

अंतर नथी जेनुं उजळुं,

ने जेने मोटापणुं मनमांय रे,

तेने बोध नव दीजीए

ने जेनी वृत्ति होय आंयने त्यांय रे ... अंतःकरणथी.

शठ नव समजे सानमां

ने भले कोटि उपाय करे,

संकल्प विकल्प जेने वधता जाय

ने एवानी अंते फजेती थाय रे ... अंतःकरणथी.

एवाने उपदेश कदी नव देवो

ने ऊलटी उपाधि वधती जाय रे,

गंगा रे सती एम बोलियां रे,

एवानो करवो नहि ईतबार रे ... अंतःकरणथी.

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