BhaktiVed
Krishna

Bansi

BhajanAuthor: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

बंसी

राधा प्यारी ! दे ! दे ! बंसी हमेरी;

बंसी हमेरी, ए बंसरी हमेरी. राधा०

ये बंसीमें मेरा प्रान बसा है;

वो बंसी लेइ गई चेरी. राधा०

ना सोनेकी, बंसी ना रुपेकी;

हरे हरे बांसकी पेरी. राधा०

काहेसे गावुं राधा ! काहेसे बजावुं ?

काहेसे लावुं गौआं घेरी ? राधा०

मुखसे गाओ, का'ना ! करसे बजाओ;

लकरीसे लावो गउंगा घेरी. राधा०

घटी एक मुखमें , घटी एक करमें;

घटी एक अधर धरी. राधा०

मीरांके प्रभु गिरिधर नागर;

चरणकमल पर बरोरी. राधा०

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