BhaktiVed
कृष्ण

बरसे बदरिया सावन की

भजनरचना: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

राग सूरदासा मलार - ताल तिताला (मध्य लय)

बरसे बदरिया सावन की, सावन की मनभावन की.

सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की.

उमडघुमड चहुं दिसिसे आयो, दामण दमके झर लावन की.

नानी नानी बूंदन मेहा बरसे, शीतल पवन सोहावन की.

मीरां के प्रभु गिरिधर नागर, आनंद मंगल गावन की.

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