BhaktiVed
ॐ

बेनी ! मारा रूदियामां लागी रे

భజనరచన: મૂળદાસ (Muldas)

बेनी ! मारा रूदियामां लागी रे

बेनी ! मारा रूदियामां लागी रे, मेरमनी चोधारी मारे काळजे कटारी…

बायुं ! मारा कलेजामां मारी रे, बेनी ! मारा रूदियामां मारी रे,

मारी छे कटारी चोधारी, मेरमनी कटारी, मारा कलेजे कटारी…

भेदु विनानी वातुं कोणे रे जाणी ? मेरमनी चोधारी, मारे काळजे कटारी…

(साखी)

मारी कटारी मूळदास क्ये जुगते करी ने जोई,

कळा बतावी काया तणी, काळज काप्यां कोई

(हदय कमळमां रमी रही, काळजां फाटयां सोई,)

काळज कापी करूणा कीधी, मुज पर कीधी महेर,

जोखो मटाडयो जम तणो, मारे थई छे आनंद लीला ल्हेर रे…

मेरमनी चोधारी मारे काळजे कटारी…०

(साखी)

पहेली कटारी ए परीक्षा कीधी बीजीए सांध्यां बाण

त्रीजी रमी त्रण भुवनमां, चोथीए वींधाणा प्राण

प्राण वींधाणा ने प्रीतुं बंधाणी, देखाडयो दशमो दुवार

कुंचीए करशनजीने वीनवुं, मारी सुरतानी लेजो संभाळ रे…

मेरमनी चोधारी मारे काळजे कटारी…०

(साखी)

आ कटारी कोईना कळ्यामां नांवे, नईं अणी ने नहीं धार,

घायल करी गई पांजरुं ई तो ऊतरी आरंपार ;

वारी वारी कहुं छुं विठ्ठला ! मारा अवगुणनो धरशो मा सार,

बेडी म देशो मारी बूडवा, मारी बेडली उतारजो भवपार रे…

मेरमनी चोधारी मारे काळजे कटारी…०

(साखी)

कुळमां दावो में छोडयो शामळा ! फळनी मेली लार,

अटक पडे व्हेला आवजो, मारा आतमना आधार ;

वारे वारे शुं कहुं विठ्ठला ! मारा अवगुण ना धरशो एक,

शामळा ! व्हाला ! तरत सिधावो मारी तरणा बरोबर टेक रे…

मेरमनी चोधारी मारे काळजे कटारी…०

(साखी)

साचा सद्गुरु सेविया, जुगते जादव वीर

मन पथ्थर हता ते पाणी कीधां, जेम नीर भेळां कीधां नीर

पाय लागुं परमेसरा, तमे देखाडयुं निज धाम रे

रामदास वचने मूळदास बोले, मारा गुरु ए बताव्युं तरवानुं ठाम रे…

मेरमनी चोधारी मारे काळजे कटारी…०

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