BhaktiVed
कृष्ण

भजन भरोंसे अविनाशी

भजनरचना: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

भजन भरोंसे अविनाशी

भजन भरोंसे अविनाशी, में तो भजन भरोंसे, अविनाशी!

जपतप तीरथे कांईये न जाणुं, फरत में उदासी रे.

मंत्र ने तंत्र कांईये न जाणुं, वेद पढ्यो न गई काशी रे

मीरां के प्रभु गिरिधर नागर, चरणकमलनी दासी रे.

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