BhaktiVed
कृष्ण

भक्ति हरिनी पदमणी प्रेमदा

भजनरचना: ગંગાસતી (Gangasati)

भक्ति हरिनी पदमणी प्रेमदा

भक्ति हरिनी पदमणी प्रेमदा पानबाई,

रहे छे हरि एनी पास रे,

एवी रे भक्ति क्यारे उरमां आवे,

ज्यारे थाव सदगुरुना दास रे ... भक्ति हरिनी

अभयभावना लक्षण बतावुं ते,

सुणो तमे एकाग्रचित्त रे,

एनां रे लक्षण सांभळता पानबाई,

अभयभाव चित्तमां प्रगटाय रे ... भक्ति हरिनी

सदगुरु वचनमां सुरताने राखो,

तो हुं ने मारुं मटी जाय रे,

निंदा ने स्तुति ज्यारे समतुल्य भासे,

त्यारे अभयभाव थयो केवाय रे ... भक्ति हरिनी

अभयभाव विना भक्ति न आवे,

मरने कोटि करो उपाय रे,

गंगासती एम बोलिया पानबाई,

ते विना जीवपणुं न जाय रे ... भक्ति हरिनी

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