BhaktiVed
ॐ

ब्रह्ममां भळवुं होय तो

भजनरचना: લોયણ (Loyan)

जी रे लाखा ! ब्रह्ममां भळवुं होय तो हेत वधारो जी हो जी;

अने मनना प्रपंचने मेलो रे हां !

जी रे लाखा ! नूरत-सूरतथी फरी ल्यो ने मेळा जी हो जी;

अने फळनी इच्छाने त्यागो रे हां !

जी रे लाखा ! तरणा बरोबर आ जगतनी माया छे हो जी;

एने जाणजो मनथी जूठी रे हां !

जी रे लाखा ! काळने झपाटे ए तो झडपाई जाशे जी हो जी;

त्यारे जीवडो तो जाशे ऊडी रे हां !

जी रे लाखा ! जागीने जोशो तो तमने ईश्वर मळशे जी हो जी;

त्यारे मन पाछु पडशे हां,

जीरेलाखा संकल्प विलकनी गांठुं बधाणीजी,

ए ते गुरू वचनथी गळसे हां.-३

जीरेलाखा हार न पामे तमे हीमत राखे,

एवा गुरू वचन रस चाखे! हां.

जीरेलाखा शैलीनी चली सति लाय” एल्याजी,

तमे सुखथी असत्य नव भाषा.४.

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