BhaktiVed
कृष्ण

चाल रमीये सही, मेल मथवुं महि

भजनरचना: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)

चाल रमीये सही, मेल मथवुं महि

चाल रमीये सही, मेल मथवुं महि वसंत आव्यो वन वेल फूली,

मूलीया अंब कोकिला-ल वे कदम्ब, कुसुम-कुसुम रह्या भ्रमर झुली.

चाल रमीये सही, मेल मथवुं महि...

पहेर शणगार ने हार गजगामिनी, क्यारनी कहुं छुं जे चाली ऊठी,

रसिक मुख चुंबिए, वळगिये झुंबीए, आज तो लाजनी दुहाइ छुटी.

चाल रमीये सही, मेल मथवुं महि...

हेते हरि वश करी लाहवो ले उर धरि, करग्रहि कृष्णजी प्रिते मळशे,

नरसैयो रंगमा अंग उन्मत थयो, खोयेला दिवसोनो खंग वळशे.

चाल रमीये सही, मेल मथवुं महि...

इस पाठ का वीडियो नहीं है।YouTube पर खोजें

ये भी पढ़ें