BhaktiVed
कृष्ण

छप्पन भोग जीहां

भजनरचना: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)

पद ३२ राग एज.

छप्पन भोग ज्यां, कवण तांदुल त्यां? आपतां उर संकोच आवे;

जेरे जोइये ते, आवी मळे कृष्णने, तांदुल भेट ते तुच्छ कहावे.

– छप्पन. १

धाइ लीधा हरि, मूठी तांदुल भरी, प्रेमे आरोगिया तृप्ति पामी,

इंद्र कुबेरथी अधिक वैभव कर्यो, रूकमिणी कर ग्रह्यो शीश नामी

– छप्पन. २

एक रह्यां अमो , बीजा तमो, भक्तने अढळक दान करतां,

प्रेमदाये प्रेमना, वचन एवां कह्यां, हाथ साह्यो त्रीजी मुठ्ठी भरतां

– छप्पन. ३

विनता वचन ते, विप्र समज्यो नहीं, चालवा घर भणी शीख मागी;

नरसैंन नाथे, दुरबळपणुं टाळियुं, भूखना दुःखनी भीड भांगी.

– छप्पन. ४

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