BhaktiVed
Mata / Devi

Chhutan Chhuta Tir Amane Maro Ma

BhajanAuthor: ગંગાસતી (Gangasati)

छूटां छूटा तीर अमने मारो मा

छूटां छूटा तीर अमने मारो मा रे बाईजी

मुजथी सह्यां नव जाय रे

कलेजा अमारा एणे वींधी नाख्यां बाईजी

छाती मारी फाटुं फाटुं थाय रे .... छूटां छूटां तीर

बाण रे वाग्या ने रुंवाडा वींधाणा

मुखथी नव सहेवाय रे

आपोने वस्तु अमने लाभ ज लेवा

परिपूर्ण करोने काय रे ... छूटां छूटां तीर

बाण तमने हजी नथी लाग्यां पानबाई

बाण रे वाग्यां ने घणी वार रे,

बाण रे वाग्याथी सुरता चढे आसमानमां

ने देहनी दशा मटी जाय रे .... छूटां छूटां तीर

बाण रे वाग्यां होय तो बोलाय नहीं पानबाई

परिपूर्ण वचनमां वर्ताय जो,

गंगा सती रे एम ज बोलिया

पूर्ण अधिकारी कहेवाय जो .... छूटां छूटां तीर

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