BhaktiVed
Krishna

Dhyan Dhar, Dhyan Dhar

BhajanAuthor: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)

राग रामकली-भैरव अथवा प्रभातियुं

ध्यान धर, ध्यान धर, नेत्रमां नाथ छे, अंतर भाळनी एक सुरति;

देहीमां दरसशे, प्रेमथी परसशे, अजब अनुपम अधर मूरति ... ध्यान०

मन परसन थशे, कर्यां कर्म नासशे, भासशे भूमि व्रज वन वेली;

कुंज ललित मांहे कृष्ण क्रीडा करे, नीरखती नौतम संग सहेली ... ध्यान०

मोरलीना नादमां, श्रवणना सादमां, झांझरी झालरी झमक वाजे;

ताल मृदंग ने चंग उपमा घणी, भेरी शरणाईमां ब्रह्म गाजे ... ध्यान०

सुरत संग्राम विशे नाथ बहु विलसे, दरसशे देहीथी भजन करतां;

नरसैंयानो स्वामी सर्व सुख आपशे कापशे दुक्रित ध्यान धरतां ... ध्यान०

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