BhaktiVed
ॐ

Dhyan Dharna Kayam Rakhvi

BhajanAuthor: ગંગાસતી (Gangasati)

ध्यान धारणा कायम राखवी

ध्यान धारणा कायम राखवी,

ने कायम करवो अभ्यास रे,

भाळी गया पछी तृपत न थावुं,

ने विशेष राखवो उल्लास रे ... ध्यान.

गुरुना वचनमां सांगोपांग ऊतरवुं;

ने कायम करवुं भजन रे,

आळस करीने सुई नव रहेवुं,

भले कबजे कर्युं पोतानुं मन रे ... ध्यान.

आठे पहोर रे'वुं आनंदमां,

जेथी वधु ने वधु जागे प्रेम रे;

हंमेशा अभ्यास मूकवो नहि,

ने छोडी देवुं नहि नेम रे ... ध्यान.

नित्य पवन ऊलटाववो,

ने रमवुं सदा हरिनी संग रे,

गंगासती एम बोलियां रे,

पछी चडे नहि दूजो रंग रे ... ध्यान.

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