BhaktiVed
ॐ

Ekagra Chitt Kari Sambhlo

BhajanAuthor: ગંગાસતી (Gangasati)

एकाग्र चित्त करी सांभळो

एकाग्र चित्त करी सांभळो रे पानबाई,

मोटो कहुं छुं इतिहास रे,

ए इतिहास सांभळशो त्यारे

प्रगटशे पूर्ण विश्वास रे ... एकाग्र

मनवाणीथी परनी वृत्ति जेणे,

मोहजीत एवुं एनुं नाम रे,

भजन करे आठे प्होर हरिनुं,

ले छे निरंतर नाम रे ... एकाग्र

वेद करे छे जेनां वखाण ने

जे खोज्यो न आवे हाथ रे,

बेहदनी जेणे भक्ति कीधी रे,

ए रमी रह्यो तेनी साथ रे ... एकाग्र

मळविक्षेप जेना मटी गया रे,

टळी गया दूबजाना डाघ रे,

गंगा सती एम बोलिया रे पानबाई,

एवाने प्रकटे वैराग्य रे ... एकाग्र

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