BhaktiVed
कृष्ण

एवो केजो रे संदेशो ओधा

भजनरचना: મોરાર સાહેબ (Morar Saheb)

एवो केजो रे संदेशो ओधा

के जो रे संदेशो ओधा ! श्यामने…तमे छो मोयला आधार रे,

नीरख्या विना रे मारा नाथ, सूनो आ लागे संसार रे…

के जो रे संदेशो…

दिन दिन दुःखडां अति घणा, जोबन वह्यां वह्यां जाय रे ;

गोविंदा विना रे घेली गोपीयुं, अगनी केम रे ओलाय रे…

के जो रे संदेशो…

रतुं रे पलटियुं वनडां कोळिया, बोले बापैया रूडा मोर रे ;

पियु पियु शबद सोहामणा, चित्तडुं नो रिये मारूं ठोर रे…

के जो रे संदेशो…

जीवन ओधाजी ! मारुं जे थकी, अळगा केम रे रे वाय रे ;

जळ रे विछोई जेम माछली, जळमां रिये तो सुख थाय रे…

के जो रे संदेशो…

बळेलांने शुं बाळीए ? कानजी विचारो मनडा मांय रे ;

दरदीने दुःखडां तुं दईश मा, दरद सह्यां नव जाय रे…

के जो रे संदेशो…

आ रे संदेशो व्रजनारनो, वांचीने करजो विचार रे ;

दरशन देजो मोरारने, सानमां समजी लेजो सार रे…

के जो रे संदेशो…

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