BhaktiVed
ॐ

Ghadi Ek Nahin Jai Re

Bhajan

घडी एक नहीं जाय रे, तुम दरसन बिन मोय,

तुम हो मेरे प्राणजी, कासूं जीवण होय.

धान न भावै, नींद न आवै, बिरह सतावै मोय,

घायल सी घूमत फिरुं रे, मेरो दरद न जाणे कोय.

दिवस तो खाय गवाईयो रे, रैण गवाई सोय,

प्राण गवाया झरतां रे, नैन गवाया रोय.

जो मैं ऐसी जाणती रे, प्रीति कियां दुःख होय,

नगर ढंढेरा फेरती रे, प्रीति करो मत कोय.

पंथ निहारुं, डगर बुहारुं, ऊभी मारग जोय,

मीरां के प्रभु कब रे मिलोगे, तुम मिलियां सुख होय.

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