BhaktiVed
Krishna

Giri Taleti Ne Kund Damodar

garbaAuthor: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)

एक प्रतमां “नागरना” छे. ढंग. गिरि.

मौन ग्रहीने मेहेताजी चाल्या, अधवधराने शुं उत्तर देउं;

जाग्या लोक नर नारी पूछे, मेहेताजी तमे एवा शुं ?. गिरि.

नात न जाणो ने जात न जाणो, ना जाणो कई विवेकविचार;

गिरि तळेटी ने कुंड दामोदर, त्यां मेहतोजी नहावा जायः

ढेढ वरणमा दृढ हरिभक्ति, ते प्रेम धरिने लाग्या पाय. गिरि.

करजोडीने प्रार्थना कीधी, विनतितणा बहु वद्या रे वचंनः

महांत पुरुष अमारी अरज एटली, अमारे आंगणे करो रे कीर्तन. गिरि.

प्रेम पदारथ अमो रे पामिये, वामिये जन्म मरण जंजाळ;

करजोडता करुणा उपजी, महेताजी वैष्णव परम दयाळ. गिरि.

पक्षापक्षी त्यां नहि परमेश्वर, सम दृष्टिने सर्व समान;

गौमूत्र तुलसी वृक्ष लीपजो, एवुं वैष्णवने आप्युं वाक्यदान. गिरि.

मेहेताजी निशाए आव्या, लाव्या प्रसाद ने कर्यो ओच्छव;

भोर थया लगि भजन कीधुं, संतोषा पाम्या सौ वैष्णव. गिरि.

घेर पधार्या हरि जश गाता, वाता ताळ ने शंख-मृदंग

हसी हसी नगरो ताळियो ले छे, आ शारे ब्राह्मणना ढंग. गिरि.

मौन ग्रहीने मेहेताजी चाल्या, अधवधराने शुं उत्तर देउं;

जाग्या लोक नर नारी पूछे, मेहेताजी तमे एवा शुं ?. गिरि.

नात न जाणो ने जात न जाणो, ना जाणो कई विवेकविचार;

करजोडी कहे नरसैंयो, वैष्णवतणो मने छे आधार. गिरि.

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