BhaktiVed
Krishna

Gokul Aavo Girdhari

garba

गोकुळ आवो गिरधारी

(चोमासानो चारणी छंद)

अषाढ उच्चारम्, मेघ मल्हारम्

बनी बहारम्, जलधारम्

दादुर डक्कारम्,

मयुर पुकारम् तडिता तारम्,

विस्तारम् ना लही संभारम्,

प्यारो अपारम् नंदकुमारम्

निरख्यारी कहे राधे प्यारी,

हुं बलिहारी

गोकुळ आवो गिरधारी

श्रावण जल बरसे,

सुंदर सरसें बादल भरसे,

अंबरसें तरुवर विरिवरसे,

लता लहरसे नदियां परसे,

सागर सरसें दंपती दुःख ह रसे,

सेज समरसें लगत जहरसें,

दुःखकारी कहे राधे प्यारी,

हुं बलिहारी

गोकुळ आवो गिरधारी

भाद्रवट भरिया,

गिरिवर हरिया प्रेम प्रसरिया,

तन तरिया मथुरामें गरिया,

फेरन फरिया कुबजा वरिया,

वस करियां व्रजराज विसरिया,

काजन सरिया मन नहि ठरिया,

हुं हारी कहे राधे प्यारी,

हुं बलिहारी

गोकुळ आवो गिरधारी

आसो महिनारी,

आस वधारी दन दशरारी,

दरशारी नवनिधि निहारी,

चढी अटारी वाट संभारी,

मथुरारी भ्रखुभान दुलारी,

कहत पुकारी तमे थीयारी

तकरारी कहे राधे प्यारी,

हुं बलिहारी

गोकुळ आवो गिरधारी

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