BhaktiVed
Ram

Gupat Ras Aa Jani Lejo

BhajanAuthor: ગંગાસતી (Gangasati)

गुपत रस आ जाणी लेजो

गुपत रस आ जाणी लेजो पानबाई!

जेथी जाणवुं रहे नहि कांई,

ओघ रे आनंदना कायम रहे,

ने सेजे संशय बधा मटी जाय ... गुपत.

शुरवीर थैने संग्रामे चडवुं पानबाई,

मायलुं मन फरी ऊभुं न थाय;

केवळ भक्तिने तमे एम पामो पानबाई,

जेथी जनम मरण सहेजे मटी जाय ... गुपत.

परपंचनां तोडी नाखो पडल पानबाई,

तो तो पचरंगी पार जणाय;

जथारथ पदने जाण्या पछी पानबाई,

भाव कभाव मनमां नहि थाय ... गुपत.

मेदानमां हवे मामलो मचावो पानबाई,

भजन करो भरपूर,

गंगा रे सती एम बोलियां रे,

वरसावो निर्मळ नर ... गुपत.

No video for this text yet.Search on YouTube

Also read