BhaktiVed
Ram

Haji Na Dharayo

BhajanAuthor: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)

हजी न धरायो रंग ते रमतां, चार पोहोर नीशा निकर निमगतां—टेक

अधर सुधारस पीजी पीजी पीधिरे, केसरी कामने में पुंठडी न दीधीरे. हजी.

पीन पयोधर पाखर कीधीरे, सुरतसंग्रामे हुं वढती सूधीरे. हजी.

नख शीखा लगे ताकी ताकी मूकीरे, केसरी कामशुं वढती न चूकीरे. हजी.

उद्यो दिवाकर रजनी वीतीरे, नरसिंहाचा स्वामी संगम जीतीरे. हजी.

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