BhaktiVed
कृष्ण

हारने काजे नव मारीए

भजनरचना: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)

हारने काजे नव मारीए

हे जी व्हाला ! हारने काजे नव मारीए,

हठीला हरजी अमने,

मार्या रे पछी रे मारा नाथजी, बहु दोष चडशे तमने…

एवा हारने काजे नव मारीए…

हे जी व्हाला ! अरधी रजनी वीती गई, हार तमे लावोने व्हेला,

मांडलिक राजा अमने मारशे, दिवस ऊगतां पहेलां…

एवा हारने काजे नव मारीए…

हे जी व्हाला ! नथी रे जोतो हीरानो हारलो, वेगे तमे फूलडांनो लावो,

दया रे करीने दामोदरा, दासने बंधनथी छोडावो…

एवा हारने काजे नव मारीए…

हे जी व्हाला ! कां तो रे मांडलिके तुं ने ललचावियो, कां तो चडियल रोषो,

कां तो रे राधाजीए तुं ने भोळव्यो, कां तो मारा करमनो रे दोषो…

एवा हारने काजे नव मारीए…

हे जी व्हाला ! दास रे पोतानो दुःखी जोईने, गरूडे चडजो गिरधारी,

हार रे हाथोहाथ आपजो रे, म्हेता नरसैंना स्वामी…

एवा हारने काजे नव मारीए…

इस पाठ का वीडियो नहीं है।YouTube पर खोजें

ये भी पढ़ें