BhaktiVed
Krishna

Hari ! Tum Haro Janki Bhir

BhajanAuthor: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

राग श्याम कल्याण - ताल रूपक

हरि ! तुम हरो जनकी भीर ... टेक

द्रौपदी की लाज राखी, तुम बढायो चीर.

भक्त कारन रूप नरहरि, धर्यो आप शरीर,

हरिन कश्यप मार लिन्हो, धर्यो नाहिन धीर.

बूडते गजराज राख्यो, कियो बाहिर नीर,

दास मीरां लाल गिरिधर, दुःख जहां तहां पीर.

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