BhaktiVed
कृष्ण

हरि वसे छे हरिना जनमां

भजनरचना: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

हरि वसे छे हरिना जनमां

हरि वसे छे हरिना जनमां,

शुं करशो जई वनमां… टेक

भेख धरीने तमे शीद भटको छो,

प्रभु नथी वन के अरण्यमां;

काशीए जाओ भले गंगामां न्हावो,

प्रभु नथी पाणी के पवनमां… हरि..

जोग करो भले जगन करावो,

प्रभु नथी व्योम के हवनमां;

बाई मीरां कहे प्रभु गिरिधरनागर,

हरि वसे छे हरिना जनमां… हरि..

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