BhaktiVed
कृष्ण

हरिनाम बिना नर ऐसा हय

भजनरचना: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

हरिनाम बिना नर ऐसा हय

हरिनाम बिना नर ऐसा हय,

दीपक विना मंदिर जैसा हय. हरि०

जेसे शशी बिना रजनी सोही हय;

जेसे बिना लून की रसोई हय;

जेसे गुरु बिनाका चेला हय. हरि०

जेसे पुरुष बिनाकी नारी हय;

जेसे पुत्र बिनाकी मातारी हय;

गुनका घर पुत्र ज जेसा हय. हरि०

ठूंठर बिना वृक्ष बनाया हय;

जेसे सूम संचरी माया हय;

जल बीन सरोवर जेसा हय. हरि०

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