BhaktiVed
Krishna

Hariras Gava Ne Je Male Khava

BhajanAuthor: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)

हरिरस गावा ने जे मळे खावा

हरिरस गावा ने जे मळे खावा, हरिनी ईच्छानो संतोष लावी,

करमचा भोग ते भोगव्य छूटको, नीपजे सर्वथा होय भावी. - हरिरस. १.

घेर दारा एक सुंदरी साधवी, हरि-जश तेहने अधिक वहाला,

नहीं कोई वेध-विचार मनमां धरे, न लहे, परपंच अस्त्रीना चाला - हरिरस. २.

एक छे पुत्रने एक पुत्री थई, जेनुं मामेरुं करशे लक्ष्मीनाथ,

सुत तणु नाम ते दास शामळ धर्युं, वुहवामां कृष्णजी रहेशे साथे. - हरिरस. ३.

द्वादश वरस थया छे कुंवरने, कामिनी आवी ऊभी कंथ पासे,

'आपणुं घर ते आद्य मोटु सदा, निर्धन विहवा केम थाशे ? ' - हरिरस. ४.

'दुःख म धर भामिनी ! वात सुण कामिनी, पूरशे मनोरथ कृष्णकामी

ध्यान धर कृष्णनु, राख मन प्रसन्न तुं सहाय थाशे नरसैयानो स्वामी.' - हरिरस. ५.

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