BhaktiVed
Krishna

He Kanuda Tori Govalan

BhajanAuthor: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)

हे कानुडा तोरी गोवालण

हें कानुडा तोरी रे गोवालण, मोरलीए ललचाणी रे,

हें कानुडा तोरी गोवालण…

हरखें में तो ईंढोणी लीधी, भरवा हाली हुं तो पाणी रे;

गागर भरोंसे गोळी लीधी, आरानी हुं अजाणी रे…

हें कानुडा तोरी गोवालण…

गाय भरोंसे गोधाने बांध्यो, दोह्यांनी हुं अजाणी रे;

,वाछरुं भरोंसे छोकरांने बांध्या, बांध्या छे बहु ताणी रे…

हें कानुडा तोरी गोवालण…

रवाई भरोंसे घोसरुं लीधुं, वलोव्यानी हुं अजाणी रे,;

नेतरां भरोंसे साडी लीधी, दूधमां रेडयां पाणी रे…

हें कानुडा तोरी गोवालण…

घेली घेली मने सौ कोई कहे छे, घेली हुं रंगमां रे’ली रे;

भले मळ्या मेता नरसिंहना स्वामी, पूरण प्रीत हुं पामी रे

हें कानुडा तोरी गोवालण…

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