BhaktiVed
माता

हे रंगलो

garba

हे रंगलो

हे रंगलो,

जाम्यो कालंदरी ने घाट,

छोगाळा तारा,

हो रे छबीला तारा,

हो रे रंगीला तारा

रंगभेरू जुए तारी वाट, रंगलो…

हे हाल्य हाल्य हाल्य,

वही जाय रात वात मां ने,

माथे पडशे प्रभात,

छोगाळा तारा,

हो रे छबीला तारा,

हो रे रंगीला तारा रंगभेरू जुए तारी वाट, रंगलो.

हे रंगरसीया,

हे रंगरसीया तारो राहडो मांडी ने, गामने छेवाडे बेठा,

काना तारी गोपलीए, तारे हाटु तो काम बधा मेल्यां हेठां.

हे तने बरके तारी जशोदा तारी मात…

छोगाळा तारा,

हो रे छबीला तारा,

हो रे रंगीला तारा रंगभेरू जुए तारी वाट, रंगलो.

मारा पालव नो छेडलो मेल,

छोगाळाओ छेलके

मन मारुं मलके छे.

ए हुं मोरलो ने तुं तो मारी ढेल,

हुं छोडवो तुं वेलके

मन मारुं घडके छे.

हे हे हे…..हे जी

सांज ने सुमारेज्यारे सुर ज्यां नमे

नर नार लगे तारसंग रंग रमे

कोइ रूपनी कटोरी, कोइ रूपनो कटोरो

कोइ श्याम, कोइ गोरो

रमे छोरी अने छोरो

धरणी धमधमे…..

हे जी रे…..तुर तुर तुर

गांडीतुर शरणाइ केरा सुर

वींधे उर चकचुर

संगे ताल ने नुपुर

तारु पादर ने पुर

साम साम सामे

हे जीणुं जीणुं वागती रे वेणुंरे

ने गामने पादर उडती रे रेणुं

ने नाचती रे आवे कोइ गामनी रे घेनुं

छेल रे छबीली नार छम् छम् छमे.

छेल रे छबीली नार छम् छम् छमे.

इस पाठ का वीडियो नहीं है।YouTube पर खोजें

ये भी पढ़ें