BhaktiVed
कृष्ण

हुं रोई रोई अखियां राती करुं

भजनरचना: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

हुं रोई रोई अखियां राती करुं

हुं रोई रोई अखियां राती करुं,

राती करुं, गीत गाती फरुं ... हुं रोई रोई.

अन्य कोई मारी नजरे न आवे,

वर तो एक गिरिधारी वरुं ... हुं रोई रोई.

सेवा ने स्मरण एनुं ज निशदिन,

हृदयकमळमां ध्यान धरुं ... हुं रोई रोई.

मीरां कहे प्रभु गिरिधर नागर,

गंगा-जमनामां न्हाती फरुं ... हुं रोई रोई.

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