BhaktiVed
माता

हुं शुं जाणु जे व्हाले मुजमा शुं दिठ्यु

भजनरचना: દયારામ (Dayaram)

हुं शुं जाणुं जे व्हाले मुजमा शुं दिठ्यु

वारे वारे सामुं आवे मुख लागे मीठुं. हुं शुं जाणुं जे

हुं जाउं जळ भरवा त्यां पुंठे पुंठे आवे;

वगर बोलाव्यो व्हालो ब्हेडलुं चडावे. हुं शुं जाणुं जे

वढुं ने तरछोडुं तोये रीस न लावे;

कांइ काइं मीषे म्हारे घेर आवी बोलावे. हुं शुं जाणुं जे

दूरथकी देखी व्हालो मुने डोड्यो आवी दोटे;

पोतानी माळा कहाडी पेरावे म्हारी कोटे. हुं शुं जाणुं जे

मुने एकलडी देखी त्यां म्हारे पावले लागे;

रंक थइ कांइ कांइ म्हारी पासे मागे. हुं शुं जाणुं जे

मुने ज्यां ज्यां जाती जाणे त्यांथी ए आवी ढूंके;

बेनी दयानो प्रीतम म्हारी केड नव मूके. हुं शुं जाणु जे.

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