BhaktiVed
कृष्ण

हुं तो गिरिधरने मन भावी

भजनरचना: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

हुं तो गिरिधरने मन भावी

राणाजी, हुं तो गिरिधरने मन भावी.

पूर्व जन्मनी हुं व्रजतणी गोपी,

चूक थतां अहीं आवी रे ... राणाजी हुं.

जन्म लीधो नृप जयमल घेरे,

तम संगे परणावी रे ... राणाजी हुं.

गिरिधर नाम हुं तो घडी नव छोडुं,

झेर दई नाखे मरावी रे ... राणाजी हुं.

मीरां कहे प्रभु गिरिधर नागर !

हरिसंगे लगनी लगावी रे ... राणाजी हुं.

इस पाठ का वीडियो नहीं है।YouTube पर खोजें

ये भी पढ़ें