BhaktiVed
Krishna

Hun To Parni Pritamni Sangath

BhajanAuthor: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

हुं तो परणी प्रीतमनी संगाथ

हुं तो परणी प्रीतमनी संगाथ, वहालमजी.

बीजानां मींढळ नहीं रे बांधु... हुं तो परणी

चार चार जुगनी चोतरीओ चितरावी रे वहालमजी,

हुं तो मंगळ वरती छुं बे ने चार... बीजानां मींढळ.

राजसी भोजन जमवां नथी रे वहालमजी,

अमे प्रेमना टुकडा मागी खाशुं रे... बीजानां मींढळ.

मोतीनी माळा काम न आवे रे वहालमजी,

अमे तुलसीनी माळा पहेरी रहीशुं रे... बीजानां मींढळ.

हीर तणां चीर काम न आवे रे वहालमजी,

अमे भगवा पहेरीने नित्य फरशुं रे... बीजानां मींढळ.

बाई मीरां कहे प्रभु गिरिधर नागर वहाला,

हुं तो प्रभुने भजीने थई छुं न्याल रे... बीजानां मींढळ.

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