BhaktiVed
Mata / Devi

Hun To Vari Re...

BhajanAuthor: પ્રેમાનંદ સ્વામી (Premanand Swami)

हुं तो वारी रे गिरिधरलाल, मोळीडे तारे रे;

आवी अटक्या छो अलबेल, चितडे मारे रे.

तमे राजी थईने महाराज, मारे घेर आवो रे;

हुं तो तलखुं तमरे काज, हसीने बोलावो रे.

मारुं मंदिरियुं महाराज, पावन करवा रे;

आवो अलबेला आधार, चित्त मारुं हरवा रे.

तमे आवतां अलबेल, बीक मा आणो रे;

मारे म्,अंदिरिये महाराज, गमतुं माणो रे.

तारुं मुखडुं जोवा नाथ, थई छुं घेली रे;

आवो प्रेमानंद प्राण, छोगलां मेली रे.

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