BhaktiVed
Ram

Ja Mukh Sen Siyaram Na Samarya

BhajanAuthor: ખીમ સાહેબ (Khim Saheb)

जा मुख सें सियाराम न समर्या

जा मुख सें सियाराम न समर्या..

जा मुखसें सियाराम न समर्या ,ता मुखमें तेरे धूर परी ...

जा मुखसें सियाराम न समर्या....०

राम नाम बिन रसना केसी? कर उनकी टूकडा टूकडी,

जिन लोचन हरि रूप न नीरख्या ,ता लोचन में लण भरी ..

-जा मुखसें सियाराम न समर्या....०.

रतन पदारथ मनुष्य जनम हे, आवत नहीं कुछ फेर फरी ,

अब तेरो दाव पड्यो हे मुरख !करनां होय सो लेने करी...

-जा मुखसें सियाराम न समर्या....०

धिक्‌ तेरो जनम जीवन तेरो धिक्‌ हे,धिक्‌ धिक्‌ मनष्यकी देह धरी,

जीवत तात मूवे नहीं तेरा, कयं तं आयो गेमार फरी...

-जा मुखसें सियाराम न समर्या....०

पांव पसारी सकृत नव कीनो,जप तप तीरथे डग ना भरी,

खीम कहे नर आयो एसो जायगो, वा कं खाली खेप परी ...

-जा मुखसें सियाराम न समर्या....

No video for this text yet.Search on YouTube

Also read