BhaktiVed
शिव

जागीने जोउं तो

prabhatiyaरचना: નરસિંહ મહેતા (Narsinh Mehta)

जागीने जोउं तो जगत दीसे नहीं, ऊंघमां अटपटा भोग भासे;

चित्त चैतन्य-विलास-तद्रुप छे, ब्रह्म लटका करे ब्रह्म पासे. टेक.

पंच महाभूत परब्रह्म विषे ऊपन्यां, अणु अणु मांहि रह्या रे वळगी;

फूल अने फळ ते तो वृक्षनां जाणवां, थडथकी डाळ ते नहि रे अळगी. जा०

वेद तो एम वदे, श्रुति-स्मृति शाख दे, कनक कुंडळ विशे भेद नोये;

घाट घड्या पछी नाम रूप जूजवां, अंते तो हेमनुं हेम होये. जा०

जीव ने शिव तो, आप ईच्छाए थया, रची परपंच चौद लोक कीधां;

भणे नरसैंयो ए, ते ज तुं, ते ज तुं, एने समर्याथी कंई संत सीध्या. जा०

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