BhaktiVed
कृष्ण

जंगल बीच

भजनरचना: મીરાંબાઈ (Meera Bai)

जंगल बीच

जंगल बीच सांया! में तो पकडी आंबलियानी डाळ रे.

जंगल बीच में खडी हो जी.

सरोवर कांठे बेठोइ एक बगलो

हंसलो जाणेवेने कर्यो में संग रे

मोढामां लीधेल माछली हो जी. -सांया.

ऊडी गियो हंसलो, गाजे एनी पांखडी,

बायु! मरो पियुडो गियो परदेश रे,

फरुके मारी आंखडी हो जी. -सांया.

बाई मीरां गूंथे हार, फूल केरा गजरा,

बायुं! मारो शामळियो रूडो भरथार रे,

बीजा रे वरनी आँखडी हो जी. -सांया.

बाई मीरां कहे छे प्रभु गिरिधरना गुण व्हाला!

शरणुं राखो मर श्याम रे,

भजन करीए भावथी हो जी... -सांया.

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