BhaktiVed
ॐ

Jena Man Nav Dage

BhajanAuthor: ગંગાસતી (Gangasati)

जेना मन नव डगे

मेरु तो डगे पण जेना मन नव डगे,

भले भांगी पडे भरमांड रे,

विपत पडे पण वणसे नहीं,

सोही हरिजननां प्रमाण रे. ...मेरु.

चित्तनी वृत्ति सदा निर्मळ राखे ने,

करे नहीं कोईनी आश रे,

दान देवे पण रहेवे अजाची ने,

राखे वचनमां विश्वास रे ...मेरु.

हरख ने शोकनी न जेने आवे हेडकी ने,

आठे पहोर रहेवे आनंद जी,

नित्य रहे सतसंगमांने,

तोडी दीधां माया केरां फंद रे ...मेरु.

संगत करो तो तमे एवानी करजो ने,

भजनमां रहेजो भरपूर रे,

गंगासती एम बोलियां रे,

जेनां नयणोमां वरसे साचां नूर रे...मेरु.

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