BhaktiVed
ॐ

झीलवो ज होय तो रस

भजनरचना: ગંગાસતી (Gangasati)

झीलवो ज होय तो रस

झीलवो ज होय तो रस झीली लेजो पानबाई,

पछी पस्तावो थाशे रे;

अगम अगोचर रसनुं नाम छे,

ए तो पुरण अधिकारीने ठेराशे ... झीलवो ज होय

मान रे मेल्या पछी रस तमने मळशे पानबाई!

जुओने विचारी तमे मनमां रे,

दृश्य पदारथ नथी रे'वाना पानबाई,

सुणो चित्त दईने वचनमां रे... झीलवो ज होय.

आ तो गुंजानो लाडवो पानबाई,

अहंभाव गया विना न खवाय रे.

कोटि जनमनी मटाडो झंखना त्यारे,

जाति रे पणुं वयुं जाय ... झीलवो ज होय.

दृष्टि राखो गुपत चाखो पानबाई,

तो तो सहेजे आनंद वरताय रे,

गंगा सती एम बोलियां रे पानबाई,

आपमां आप मळी जाय ... झीलवो ज होय.

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