BhaktiVed
Mata / Devi

Jhule Jhule Chhe Gabbarni Mat

garba

झूले झूले छे गब्बरनी मात

झूले झूले छे गब्बरनी मात अंबा झूले छे (2)

माने झूले ते झूलवानी होंश घणी

भक्तो झूलावे खम्मा खम्मा कही

भक्तो गाये ने खुशी थाय अंबा झूले छे, झूले झूले छे

माने दरवाजे नोबत गड गडे

वळी शरणायुंना सूर साथे भळे

रास मस्तीना सूर संभळाय अंबा झूले छे, झूले झूले छे

माए सोळ आभूषण अंगे धर्यां

भाले कुमकुम केसरना अर्चन कर्यां

हाथे खडग त्रिशुल सोहाय अंबा झूले छे, झूले झूले छे

माने तेजे भानु देव झांखा पडे

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशीव जेवा भजे

मानी सौ देवो आरती गाय अंबा झूले छे, झूले झूले छे

माजी चाले त्यां कुमकुमनां पगलां पडे

माजी बोले त्यां मुखडेथी फूलडां झरे

भक्तो जोईने विसरे भान अंबा झूले छे, झूले झूले छे

माना सोना-हींडोळे रत्नो जड्यां

मांए साचां मोतीना तोरण बांध्यां

महीं झळके छे तेज अपार अंबा झूले छे, झूले झूले छे

आज शोभा आरासुरनी नवली बनी

आवो आवो सौ नर नारी साथे मळी

गरबो गाये ने मा खुशी थाय अंबा झूले छे

झूले झूले छे गब्बरनी मात अंबा झूले छे

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