BhaktiVed
Shiv

Ji Re Lakha ! Rishi Re Vaishmpayan

BhajanAuthor: લોયણ (Loyan)

जी रे लाखा ! ऋषि रे वैशंपायन मारकंडने पूछे जी,

निजिया धरम एवुं शुं शुं छे हां;

जी रे लाखा ! आदिनो धरम, छे ए जूनो जी,

मारग मुक्तिनो पण ए छे हां. — टेक

जी रे लाखा ! शिव शक्ति मळीने, धरम चलाव्यो जी,

पछी नेणोथी सृष्टि रचावी हां;

जी रे लाखा ! ए ने धरमने कोई जाणे रे विवेकी जी,

जेने भक्ति ह्रदयमां भावी हां. — १

जी रे लाखा ! उच्छवास श्वासना, जाप जेने जडिया जी,

ते तो नित केणी पेरे करशे हां;

जी रे लाखा ! पांच रे तत्वने, कोरे रे मूकीने जी,

ए तो जईने अविनाशीमां भळशे हां. — २

जी रे लाखा ! श्वास जो ने शिवजीने उच्छवास जो ने शक्ति जी,

एनी जुक्ति रे कोई विरला तो जाणे हां;

जी रे लाखा ! नूरतमां कोई, जपे रे अजपा जी,

ए तो ब्रह्मना सुख ने माणे हां. — ३

जी रे लाखा ! ध्रुवनो धरम तेने, शिवजी तो वखाणे जी

जे समजे ते न मत ना ताणे हां,

जी रे लाखा ! शेलर्षीनी चेली, सती लोयण बोल्यां जी,

ते तो चाले गुरुना वचन परमाणे हां.— ४

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